Nafrat Shayari in Hindi | नफरत शायरी

जब किसो किसी न किसी कारन वाश धोखा या लड़ाई हो जाता है तब नफरत का जनम होता है आज का पोस्ट भी इसी Nafrat Shayari in Hindi | नफरत शायरी पर है.

Nafrat Shayari in Hindi

Nafrat Shayari in Hindi

मेरे दिल ने उस पर यकीन किया था,
नफरत क्यों करूँ अगर उसे दिल तोड़ दिया.. |

वो इनकार करते हैं प्यार के लिए,
नफऱत भी करते हैं तो प्यार करने के लिए…..

मेरे पास वक्त नही है,
नफ़रत करने का उन लोगो से,
जो मुझसे नफऱत किया करते है…..

Nafrat par shayari in hindi

नफरत सी होने लगी है इस सफ़र से अब,
ज़िंदगी कहीं तो पहुँचा दे खत्म होने से पहले…..

नफरत सी होने लगी है इस सफ़र से अब,,
ज़िन्दगी कहीं तो पहुँचा दे खत्म होने से पहले..

एक ही अर्ज है बनावटी प्यार न कर मुझसे,
इससे अच्छा तो नफरत कर मगर दिल से कर..

ख़याल आया तो आपका आया,
आँखे बंद की तो ख्वाब आपका आया,
सोचा कि याद करलूँ खुदा को पल दो पल,
पर होंठ खुले तो नाम आपका आया !

नफरत करने वाले भी गज़ब का प्यार करते हैं मुझसे,
जब भी मिलते हैं कहते हैं कि तुझे छोड़ेंगे नहीं…..

गुजरे हैं इश्क़ में हम इस मुकाम से
नफरत सी हो गई है मोहब्बत के नाम से
हम वो नहीं जो मोहब्बत में रो कर के
जिंदगी को गुजार दे…
अगर परछाई भी तेरी नजर आ जाए
तो उसे भी ठोकर मार दें…..

Nafrat ki shayari in hindi

सब कुछ मिला सुकून की दौलत ना मिली,
एक तुझको भूल जाने की मोहलत ना मिली,
करने को बहुत काम थे अपने लिए,
मगर हमको तेरे ख्याल से फुर्सत ना मिली !

कुछ जुदा सा है मेरे महबूब का अंदाज,
नजर भी मुझ पर है और नफरत भी मुझसे ही…..

तुम नफरत का धरना कयामत तक जारी रखो,
मैं प्यार का इस्तीफा जिंदगी भर नहीं दूंगा…..

मुझसे नफरत करने वाले भी,
कमाल का हुनर रखते है,
मुझे देखना तक नहीं चाहते,
लेकिन नजर मुझपर ही रखते है…..

मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली यारो,
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते है…..

ये ना सोचना
ये ना सोचना के मैं टूट जाऊंगा,
तुझसे दूर रहूँगा, तो चाँद चुम आऊंगा…..

मुझसे नफरत की अजब राह निकली उसने,
हँसता बसता दिल कर दिया खाली उसने,
मेरे घर की रिवायत से वोह खूब था वाकिफ,
जुदाई माँग ली बन के सवाली उसने…..

हमें बरबाद करना है तो हमसे प्यार करो
नफरत करोगे तो खुद बरबाद हो जाओगे..

न मोहब्बत संभाली गई, न नफरतें पाली गईं,
अफसोस है उस जिंदगी का, जो तेरे पीछे खाली गई…..

देख कर उसको तेरा यूँ पलट जाना,
नफरत बता रही है तूने गज़ब की मोहब्बत थी…..

नफरत भी नहीं है तुझसे,
और कोई गुस्सा भी नहीं है…..

नाराजगी, डर, नफरत या फिर प्यार,
कुछ तो जरुर है जो तुम मुझ से दूर-दूर रहते हो…..

ये मेरी मोहब्बत और उसकी नफरत का मामला है,
ऐ मेरे नसीब तू बीच में दखल-अंदाज़ी मत कर…..

पर सुन, अब तू मेरी जिंदगी का,
हिस्सा भी नहीं है…..

नफरत है इस रविवार से मुझे,
ये दिलाती है और भी तेरी याद खाली वक्त में…..

नफ़रत करना है तो इस क़दर करना कि
हम दुनिया से चले जाए,
पर तेरी आँख में आंसू ना आए…..

हमने कब कहा कि हमसे प्यार कीजिये,
नफरत कर सकते हो तो बेशुमार कीजिये…..

मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली दोस्तो,
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते हैं..

तेरी नफरतों को प्यार की खुशबु बना देता,
मेरे बस में अगर होता तुझे उर्दू सीखा देता…..

अजीब सी आदत और गज़ब की फितरत है मेरी,
मोहब्बत हो या नफरत बहुत शिद्दत से करता हूँ…..

एहसास बदल जाते हैं बस और कुछ नहीं,
वरना नफरत और मोहब्बत एक ही दिल में होती है…..

बे-हिसाब नफरत है हमें इश्क़ से,
बे-पनाह मोहब्बत जो की थी हमनें…..

ये मोहब्बत है या नफरत कोई इतना तो समझाए,
कभी मैं दिल से लड़ता हूँ कभी दिल मुझ से लड़ता है..

मुझे नफरत है इस मोहब्बत के नाम से,
क्यूँ बिना कसूर तड़पा तड़पाकर मारा है मुझे…..

तुम तुम्हारा इश्क तुम्हारी जिद्द,
मैं तुम तीनो से नफरत करता हूँ…..

दुनिया को नफरत का यकीन नहीं दिलाना पड़ता,
मगर लोग मोहब्बत का सबूत ज़रूर मांगते हैं…..

दर्द बांटते बांटते ना जाने कब दर्द देने लगे
इश्क था हमें ना जाने कब नफरत देने लगे..

फिर यूँ हुआ के गैर को दिल से लगा लिया,
अंदर वो नफरतें थी के बाहर के हो गये…..

हमें बरबाद करना है तो हमसे प्यार करो,
नफरत करोगे तो खुद बरबाद हो जाओगे…..

उसकी यादों और मोहब्बत दोनों से इतने दर्द मिले हैं ,
की अगर अब फिर नफरत का दर्द मिला यह सोच के ही डर लगता है..

कभी बैठेंगे फुरसत में खुदा के सामने और पूछेंगे,
वो कौनसी मोहब्बत थी जो हम अपने यार को दे ना सके..

मुझे नफरत पसन्द है,
लेकिन दिखावे के अपनापन नही…..

मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली दोस्तो,
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते हैं…..

दुनिया को नफरत का यकीन नही दिलाना पड़ता,
मगर लोग मोहब्बत का सबूत जरूर मांगते है…..

खुदा सलामत रखना उन्हें,
जो हमसे नफरत करते हैं,
प्यार न सही नफरत ही सही,
कुछ तो है जो वो सिर्फ हमसे करते हैं…..

ज़माना वो भी था जब तुम ख़ास थे,
ज़माना ये भी है के तेरा ज़िक्र तक नहीं…..

भरोसा कोई एक तोड़ता है,
और नफरत सब से हो जाती है…..

मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली दोस्तो,
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते हैं…..

वो बार बार पूछती है कि क्या है मौहब्बत,
अब क्या बताऊं उसे कि,
उसका पूछना और मेरा न बता पाना ही मौहब्बत है !

थे अजीज़ तुम अब जी नहीं भरता,
तुमसे बात करने का अब मन नहीं करता…..

मैने कब कहा मोहब्बत कीजिये,
क़ाबिल ए नफरत हूं आप भी कीजिये…..

तुम नफरत करो या मोहब्बत,
दोनों हमारे हक में बेहतर हैं,
नफरत करोगे तो हम तुम्हारे दिमाग में,
मोहब्बत करोगे तो दिल में बस जायेंगे…..

आये हो जो आँखों में कुछ देर ठहर जाओ,
एक उम्र गुजरती है एक ख्वाब सजाने में..!

वो नफरतें पाले रहे हम प्यार निभाते रहे,
लो ये जिंदगी भी कट गयी खाली हाथ सी…..

नफ़रत भी नहीं है गुस्सा भी नहीं हूँ,
पर तेरी जिन्दगी का अब हिस्सा भी नहीं हूँ…..

हक़ से दो तो तुम्हारी नफरत भी कबूल हमें,
खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें…..

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