Shayari on Weather in Hindi | मौसम पर शायरी

दोस्तों मौसम का बदलना मतला नए मौसम का आगमन होना प्रकृति यही रित है आज इसी पर होने आपके लिए Shayari on Weather in Hindi लाये हैं।

साथ ही दोस्तों यहाँ Weather के रिलेटेड weather quotes in hindi,Monsoon shayari in hindi,सुहाने मौसम पर शायरी,shayari on weather in hindi भी मिलेंगे।..

Shayari on Weather in Hindi

Shayari on Weather in Hindi

कम से कम अपनी जुल्फे तो बांध लिया करो
कमबख्त बेवजह मौसम बदल दिया करते हैं!!!

जिंदगी के सारे मौसम आ के रुखसत हो गए
मेरी आँखों में कही बरसात बाकी रह गई!!!

जो आना चाहो हज़ारों रास्ते
न आना चाहो तो हज़ारों बहाने।
मिज़ाज-ऐ-बरहम , मुश्किल रास्ता
बरसती बारिश और ख़राब मौसम।।

कहीं फिसल न जाऊं तेरे खायलो में चलते चलते. अपनी
यादों को रोको. मेरे शहर में बारिश हो रही है.

जब तुम अपनी जुल्फों को यू आज़ाद
करती हो
मानो ज़म्में पर घटा छा जाती हो !

तपिश और बढ़ गई इन चंद बूंदों के बाद,
काले स्याह बादल ने भी बस यूँ ही बहलाया मुझे।

सुहाने मौसम पर शायरी

बालकनी से बाहर आकर कर देखो
ये जानेजाना। मौसम तुम से मेरे दिल
की बात कहने आया है।

बरसती बारिशों से बस इतना ही कहना है
के इस तरह का मौसम मेरे अंदर भी रहता है

आज मौसम ने मूड सुहावना बना रखा है
चलो अंदर चलते है बेफ़िजूली बातों में क्या रखा है

मौसम की मिसाल दूँ या नाम लूँ तुम्हारा
कोई पूछ बैठा है बदलना किसको कहते हैं।

यूँ ही शाख से पत्ते गिरा नहीं करते,
बिछड़ के लोग भी ज्यादा जिया नहीं करते।
जो आने वाले हैं मौसम उनका एहतराम करो,
जो दिन गुजर गए उनको गिना नहीं करते।।

मौसम शायरी २ लाइन

रुका हुआ है अज़ब धुप छाँव का मौसम,
गुज़र रहा है कोई दिल से बादलों की तरह..!!

नीचे गिरे पत्ते भी सुख जाया करते है
सर्दी के मौसम में जोड़े भी रूठ जाया करते है

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा ना लगे!!!

जब तुम यूँ मुस्कुराते हुए आते हो
तो संग मौसम बाहर का लाते हो!!!

अपनी अदाओं से मौसम
को यू बदलती है
की रूठे थे तुफा और
पल भर में बारिश ला देती हो!

हमें क्या पता था मौसम ऐसे रो पड़ेगा हमने
तो आसमान को बस अपनी दास्ता सुनाई थी!!!

कुछ मीठी सी ठंडक हैं आज इन हवाओं में
शायद मौसम भी किसी की याद में सर्द हैं!!!

Mausam shayari in hindi

भूली यादों को याद कर के आज रोया हूँ
भूले जख्मो को आज फिर से म भिगोया हूँ
तभी ठंडी के मौसम में भी लंबी चदर को तान सोया हूँ।

कहाँ पूरी होती है दिल की सारी ख्वाइशें
कि बारिश भी हो , यार भी हो और पास भी हो..

दिन छोटे और रातें लम्बी हो चली है
मौसम ने यादों का वक्त बढा दिया.

बेईमान मौसम से पूछो कुछ हरकत कर रहा है
बताता नहीं क्या ……
ये मेरे हमसफर से डर रहा है

लुत्फ़ जो उस के इंतज़ार में है।
वो कहाँ मौसम-ए-बहार में है।।

कहानी बस इतनी सी थी तेरी मेरी मोहब्बत की।
मौसम की तरह तुम बदल गए
और फसल की तरह हम बरबाद हो गए।

मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा,
हमे कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा।

अपने किरदार को मौसम से बचाए रखना !
लौट कर फूलों में वापस नहीं आती खुशबू.”

आ देख मेरी आँखों के, ये भीगे हुए मौसम,
ये किसने कह दिया कि तुम्हें भूल गये हम.

खूब हौसला बढाया आँधियों ने धूल का
मगर दो बूॅद बारिश ने औकात बता दी!

जमाने भर का गम अपने कंधो पर उठा रखा है
नज़रों का कहर दिल में दबा रखा है
अपने मौसम को तो तूने सुहाना बना रखा है
हमारे मौसम को धुंए में जला रखा है

रुका हुआ है अज़ब धुप छाँव का मौसम,
गुज़र रहा है कोई दिल से बादलों की तरह.

वाह मौसम आज तेरी अदा पर
दिल को प्यार आ गया, वो पास आई,
और तू बारिश बनकर बरस गया।

काश तुझे सर्दी के मौसम मे लगे मुहब्बत की ठंड,
और तू तड़प कर माँगे मुझे कम्बल की तरह..!

दिसंबर सा मैं जनवरी से तुम
करीब हो के भी बहुत दूर हैं हम!

Barish mausam shayari in hindi

उसे बारिश‬ मे भीगना अच्छा लगता है,और ‪‎
मुझे‬ सिर्फ़ बारिश मे भीगती हुयी ‪‎वो..

कहीं फिसल ना जाऊ तेरे ख्यालों में चलते-चलते अपनी
यादों को जरा रोको मेरे शहर में बारिश हो रही हैं!!!

क्यों आग सी लगा के गुमसुम है चाँदनी,
सोने भी नहीं देता मौसम का ये इशारा।।

लो बदल गया मौसम।
हूबहू तुम्हारी तरह।

फिर से तेरी यादों का मेरे दिल में बवंङर है
वही मौसम वही सर्दी वही दिलकश नवम्बर है!

दिल खुश हो जाता था जिसके मुस्कुराने से,
ये मौसम बेरंग हो गया है उसके छोड़ जाने से.

रंग पैराहन का खुश्बू जुल्फ लहराने का नाम।
मौसम-ए-गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम।

कुछ तो हवा भी सर्द थी
कुछ था तेरा ख़याल भी,
दिल को ख़ुशी के साथ साथ
होता रहा मलाल भी।

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना
लगे,मैं शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे.

सुहाने मौसम से मैं आज भी डरता हूँ,
उसे भूलने की कोशिश आज भी करता हूँ.

मौसम की मिसाल दू या तुम्हारी कोई
पूछ रहा हैं की बदलना किसको कहते हैं!!!

अपने किरदार को मौसम से बचाए रखना
लौट कर फूलो में वापस नहीं आती खुशबू।

ये मौसम कितना प्यार है,
खूबसूरत कितना यह नजारा है,
इश्क़ करने का गुनाह हमारा है,
मेरे सीने में धड़कता दिल तुम्हारा है.

आ देख मेरी आँखों के, ये भीगे हुए मौसम,
ये किसने कह दिया कि तुम्हें भूल गये हम.

बारिश की बूँदों में झलकती है तस्वीर उनकी‬‎
और हम उनसे मिलनें की चाहत में भीग जाते हैं‬..

यूँ ही शाख से पत्ते गिरा नहीं करते
बिछड़ के लोग भी ज्यादा जिया नहीं करते
जो आने वाले हैं मौसम उनका एतराम करो
जो दिन गुजर गए उनको गिना नहीं करते।

जिसके आने से मेरे ज़ख्म भरा करते थे
अब वो मौसम मेरे ज़ख्मो को हरा करते हैं।

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था
तेरा ख़याल भी,दिल को ख़ुशी के
साथ साथ होता रहा मलाल भी।

आज है वो बहार का मौसम,
फूल तोड़ूँ तो हाथ जाम आए।।

महबूब के बिना हर मौसम उदास सा
लगता है,महबूब हो पास तो हर मौसम
ख़ास सा लगता है.

मौसम गए चैन गया ज़िन्दगी गई
मोहब्बत की आग में
क्या-क्या गया मत पूछो।

बारिश और मोहब्बत” दोनो ही य़ादगार होते है. फर्क सिर्फ़
इतना होता है. बारिश से ज़िस्मं भीगता है, और मोहब्बत से आँखे.

मौसम चल रहा है इश्क का साहिब
जरा सम्भल कर के रहियेगा !

कोई रंग नही होता बारिश के पानी में
फिर भी फ़िज़ा को रंगीन बना देता है!

प्यार करने का मौसम नहीं आता हैं,
पर जब तुम सामने आते हो, तो हर
मौसम मजेदार बन जाता हैं।

इस सर्दी के मौसम ने भी बोहोत सताया है
फिर तेरी यादों ने भी नींदो से हमें जगाया है
ठन्डे मौसम में भी हमे जोरों से रुलाया है
अकेलेपन से मुझे मेरे मित्रों ने ही तो बचाया है

तब्दीली जब आती है
मौसम की अदाओं में
किसी का यूँ बदल जाना
बहुत ही याद आता है।

हवा भी रूक जाती है कहने को कुछ तराने,
बारिश की बूंदे भी उसे छूने को करती है बहाने..

क्यूँ किसी की यादों को सोच कर रोया जाए,
क्यूँ किसी के ख्यालों में यूँ खोया जाए।
बाहर मौसम बहुत ख़राब हैं,
क्यूँ न रजाई तानकर सोया जाए।

उसे छुआ तो दिसम्बर में प्यास लगने लगी।
कि उसके ज़िस्म का मौसम तो जून जैसा है।

हमें क्या पता था, ये मौसम यूँ रो पड़ेगा।
हमने तो आसमां को बस अपनी दास्ताँ सुनाई है।

इश्क़ में सुहाना लगता है हर मौसम,
हर मौसम टूटे दिल को देता है सिर्फ़ गम.

अरे इतना भी मत सताओ
मौसम सुहाना है……
थोड़े नखरे कम करो
दूर क्यूँ हो ,थोड़ा पास आजाओ।

कहीं फिसल ना जाओ ज़रा संभल के रहना,
मौसम बारिश का भी है और मुहब्बत का भी..

हँसाना नहीं बस रुलाना जनता है हाय
ये गर्मी का मौसम बस जलाना जानता है.

दूर तक छाये थे बादल और कही साया ना था
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया ना था!!!

बलखाने दे अपनी जुल्फों को हवाओं में,
जूड़े बांधकर तू मौसम को परेशां न कर.

सुहाना मौसम भी बिगड़ जाता है
आँधियों के चलने से
धोखेबाज भी बदल जाते है
धोखेबाजियों के चलने से

आज बारिश में तुम्हारे संग नहाना है, सपना ये मेरा कितना सुहाना है,
बारिश के कतरे जो तेरे होंठों पे गिरे, उन कतरों को अपने होंठों से उठाना है..

तन्हा मौसम हैं उदास रात हैं वो मिल के
बिछड़ गए ये कैसी मुलाकात हैं दिल धडक
तो रहा हैं मगर आवाज नहीं हैं वो धड़कन
भी साथ ले गए कितनी अजीब बात हैं!!!

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे।
मैं शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे।।

बदलते लोग बदलते रिश्ते और बदलता मौसम
चाहे दिखाई ना दे पर महसूस जरुर होता हैं!!!

मौसम का मिजाज समझ में नही आता है,
यह भी इंसानों की तरह बेवफा हो जाता है.

जैसा मूड़ हो वैसा मंजर होता है..
मौसम तो इंसान के अंदर होता है…

बालकनी से बाहर आकर कर देखो ये जानेजाना।
मौसम तुम से मेरे दिल की बात कहने आया है।

आते जाते मौसम का सिलसिला जारी रहे
हर रोज हम मिलते रहे
और फासला बाक़ी रहे !

कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आए,
और कुछ मेरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी।

विचार हो जैसा वैसा मंजर होता है,
मौसम तो इंसान के अंदर होता है.

धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती ,
रात ढलती नहीं थम जाती है।
सर्द मौसम की एक दिक्कत है ,
याद तक जम के बैठ जाती है।

मौसम का कुछ ऐसा खुमार है मन करता
चीख कर कह दू हमको तुमसे बहुत प्यार है.

आज मौसम कितना खुश गंवार हो गया
खत्म सभी का इन्तजार हो गया बारिश की
बुँदे गिरी इस तरह से लगा जैसे आसमान को
जमीन से प्यार हो गया!!!

मौसम का मिजाज समझ में नही आता है,
यह भी इंसानों की तरह बेवफा हो जाता है.

इश्क की आबो हवा का तो पता नहीं पर
पर जब से तुम मिले हो मौसम रंगीन सा हैं!!!

मौसम की मिसाल दूँ या नाम लूँ तुम्हारा
कोई पूछ बैठा है बदलना किसको कहते हैं।

बदला जो रंग उसने हैरत हुयी मुझे।
मौसम को भी मात दे गयी फ़ितरत जनाब की।

सुहाना मौसम शायरी

कहीं फिसल ना जा तेरे
ख्यालो मे चलते-चलते
अपनी यादों को रोको मेरे
शहर में बारिश हो रही है।

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