Dikhawa Shayari in Hindi | Dikhawa Status

Dikhawa Shayari in Hindi

Dikhawa Shayari in Hindi

और ये जो लोग दिखावा करते हैं
अपने दिखावे को ही सच होने का दावा करते है

हमे तो दोस्तों ने ज़िन्दगी में बस यही सबक
सिखाया है, ये दोस्ती की बाते सब झूठी है सब दिखावा है।

दिखावे का प्यार करने
वाले से अच्छे तो वो लोग हैं
जो मुंह पर सच बोलते हैं
और नफरत दिखाते है..!

सच क्या है कुछ भी छुपा नहीं है उस राम से
तुम्हें पता है दिखावे की जिन्दगी कुछ वक़्त ही गुजरती है आराम से

बिठाकर मतलब की कश्ती
पर मुझे डुबाना चाहते है
मेरे कुछ अपने जो मुझे झूठा
दिलासा देकर गिराना चाहते है..!

Dikhawa quotes in hindi

नफरतों को जलाओ मोहब्बत की रौशनी होगी, वरना
इंसान जब भी जले हैं ख़ाक ही हुए है…!

कभी किसी के साथ प्यार का दिखावा मत करना क्योंकि
यह दिलों को हीं नहीं बल्कि लोगों को भी पूरी तरह से तोड़ देता है.

इश्क़ को सरे-आम बदनाम कर,
अब कपड़े उतारते हैं जनाब मोहोब्बत के नाम पर।

ये बोझ धोकेबाज़ी का उठाया नहीं जाता, पहला
धोका तो पहले धोका होता है भूले से भी भुलाया नहीं जाता।

लोगों को दिखावा पसंद ज्यादा है, अपनी
असलियत के साथ खुद को लोग मानते आधा है…!

पैसों का दिखावा करना
आजकल आम बात हो गई है.

दिखावा मंजूर है मगर हकीकत नहीं
लोगों को इसमें भी कोई दिक्कत नहीं

जो लोग दिखावे में विश्वास करते हैं,
वे हमेशा बेचैन फिरते हैं।

और दिखावे से ऊपर उठकर देखो
ए-दोस्त मेरे ये जिंदगी तुम्हारी अपनी है

इतनी तो औकात भी नहीं तुम में, जितना
तुम Attitude ले कर चलते हो…!

दिखावे के रिश्ते शायरी

बनावटी दुनिया में इंसानियत का तमाशा
देखा, आज हाथ उठे भी मदद को तो दिखावे के लिए।

हर इंसान में इतना दिखावा है जनाब जो खुद को
एक दफा आईने में देख ले तो खुद को देख नहीं पाएगा।

जिन्हें अपने बारे में पता नहीं वो औरों को जानने
का दावा करते है, लोग उतने अच्छे है नहीं जितना होने का दिखावा करते हैं…!

मोहोब्बत जो हकीकत में करते है दिखावा नहीं
करते, जो चाहने का दिखावा करते हैं वो निभाया नहीं करते।

दिखावे की ज़िन्दगी की इतनी कहानी हैं, हकीकत
एक दिन सबके सामने आनी हैं…!

दिखावे की जिन्दगी, दिखावे की मुस्कान,
खुद को आईने में तू देख कितना बदल गया इंसान…!

दिखावा मत कर मेरे शहर में शरीफ होने का…
हम खामोश तो है लेकिन ना-समझ नहीं…!!

इतनी तो औकात भी नहीं तुम में, जितना तुम
Attitude ले कर चलते हो।

अपने रिश्ते को लेकर कभी भी दिखावा नहीं करना
चाहिए, क्योंकि इसका नकारात्मक प्रभाव रिश्ते पर जरुर पड़ता है.

निभाते दुश्मनी है पर खुद को हमारा सनम
बताते हैं, लगाते नमक है पर हमे कम्बख्त मरहम बताते हैं।

तुझे तो मोहब्बत भी तेरी औकात से ज्यादा की
थी, अब तो बात नफरत की है, सोच तेरा क्या होगा…!

ये नकाब पहन कर मेरे दिल के दरवाज़े पर आया मत करो,
दुश्मन हो तो खुल कर कहो मुझे अपना दोस्त बताया मत करो।

ये जो तुमने अपना मोहब्बत भरा दिल और मासूम चेहरा दिखाया था,
वो सब झूठ था वो सब दिखावा था।

दोस्त तुम अभिनेता क्यों नहीं बन जाते, वाकई नाटक बहुत अच्छा कर लेते हो।

वादा मत किया कर दावा मत किया कर, इश्क़
निभाया ना जाए तो दिखावा मत किया कर।

अपना वही है जो
अपनो को पास लाए
बाकी सब तो जिंदगी में
फरेब के रिश्ते कहलाए..!

इस फरेबी दुनिया
से हम दूर जा रहे है
जिंदगी की कठिन राहो
पर हम चलते जा रहे है..!

इस मतलबी दुनिया में इश्क सिर्फ
दिखावा है तुझे भी धोखा मिलेगा ये मेरा दावा है।

नकली नकली सा लगने लगा है ये जमाना,
दिखावे का कितना बढ़ गया है फ़साना…!

हर कलम की नोक पर
किसी का नाम होता है
मोहब्बत में दिखावटी
चीजो का जाम होता है..!

अपने होने का दावा करते हैं लोग
और कुछ नहीं बस दिखावा करते हैं लोग

और मोहब्बत में दिखावा आम बात हो गई है
सच्ची मोहब्बत लोगों के लिए हराम बात हो गई है

दिखावा करने वालो को कोई कुछ क्यों नही
कहता हैं, अक्सर लड़कियों के सामने लड़का ज्यादा दिखावा करता हैं।

इस दिखावे की दुनिया
में मोहब्बत ना दिखा
तेरी फितरत में आज भी
मतलब का खंजर होगा..!

ऐसा नहीं है की मैं तुझसे मोहोब्बत नहीं करता, फ़र्क़
बस इतना है की मैं दिखावा नहीं करता।

इस दिखावे की दुनिया में लोग बहुत कुछ दिखा जाते हैं
जो ज्ञान लोगों के पास नहीं होता हमें वो भी सिखा जाते हैं

बाहरी दिखावे से पहले अपने घर में झाँक कर देखो, ये
खोखली नुमाइशें घर में सुख नहीं लायेंगी…!

बस हमें अच्छा लगना है यही रीजन है
आप भी करिए भाई साहब दिखावे का सीजन है

चलो आज फिर से दिखावा करते हैं…
तुम पुछो … कैसे हो ? मै कहूँ ….बस ठीक

जमाना चाहे जैसा भी हो गया हो
लेकिन मुझे नहीं लगता कि मुझे दिखावे की जरूरत है.

मेरा दिल रखने के लिए
तुम छलावा ही कर लेते
प्यार तो तुम करते नही
पर दिखावा ही कर लेते..!

दिखावे की मोहब्बत का बाज़ार चलता है
यहाँ, सच्चे एहसास रोज खुदखुशी करते है…!

दिखावा भर है वरना कहाँ अपना मानते हैं
लोग, ज़रा सा सच कहो तो कितना बुरा मानते हैं लोग।

अब तो दोस्त भी रूठने लगे हैं,
शायद मेरे दिखावे से ऊबने लगे हैं।

शून्य’ को छोड़ संख्याओं से दोस्ती की
संख्याओं ने फिर से शून्य ही बना डाला…!

पूरी छुरी नहीं चाहिए नौक ही काफी है चुभाने को, जब गिरे
हम कामियाबी के गद्दी से नीचे तो लंगड़े दौड़े हमारा फायदा उठाने को।

दिखावे की भी एक सीमा होती है, उस सीमा को
पार करने का मतलब होता है, मुसीबत को न्योता देना.

मतलब वाली दूकान में, अब इश्क़ बिकती हुई एक सामान है, सिक्को
की गूँज बहरी कर रही, एहसास अनसुनी से परेशान है।

दिखावा लोग करते हैं
और दिखावे पे ही ये लोग मरते हैं

जितनी लंबी चादर उतने ही पैर पसारो
जैसे हो वैसे रहो इस दिखावे को गोली मारो

अपनी असलियत भूल जाएंगे लोग इस दिखावे
के चक्कर में आएंगे नहीं फिर कभी खुद खुद की ही पकड़ में…!

ये जो साथ निभाने का वादा करते हैं
इनकी बातों में अपनापन कम होता है ये दिखावा ज्यादा करते हैं

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